आज हमारा ७४वा स्वाधीनता दिवस है। सभी भारतवासियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण उत्सव है।अधिकतर लोग इस दिन अपनी देश भक्ति की भावना प्रदर्शित करने के लिए कुछ न कुछ विशिष्ट करते हैं।पूरा देश तिरंगे के रंग में रंगा नज़र आता है।हर जगह देशभक्ति के गाने गुंजायमान रहते हैं।
पर इस वर्ष कोरोना रूपी महामारी ने इस उत्सव के उत्साह को मद्धम कर दिया है।किसी भी प्रकार के सामुहिक आयोजन पर रोक होने की वजह से आमतौर पर होने वाली धूमधाम गुम है।सुबह से नहाधोकर, साफ सुथरे कपड़े पहने,हाथों में तिरंगा थामे बच्चों के झुंड घरों में उदास बैठे हैं।ये दिन तो विद्यालयों में विशेष होता था।सुंदर सजावट,झंडावंदन, रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम, मिष्ठान्न वितरण और मित्रों के साथ मौज मस्ती।समय कब निकल जाता, पता ही नही चलता था।पर इस बार तो वैसे ही विद्यालय और शिक्षकों को देखे बहुत समय हो गया।और इस उत्सव ने इस कसक को और बढ़ा दिया है।
बच्चे क्या बड़े भी उदास हैं।सरकारी अवकाश तो इस बार भी है,पर एक दूसरे को मिलकर बधाइयाँ देने का सिलसिला टूट चुका है।झंडावंदन करना,राष्ट्रगान गाना और खड़े होकर तिरंगे को सम्मान देते समय ऐसा महसूस करना कि हम भी इस देश के सिपाही हैं,वो सब हृदय को साल रहा है।
महिलाएं भी उस उत्सवी माहौल को बहुत याद कर रही हैं। सुबह सुबह सबका जल्दी घर से निकलना,पर सबके लौटने तक कुछ विशेष व्यंजन बनाकर तैयार रखना।और फिर कहीँ बाहर जाकर छुट्टी का आनंद लेना।पर इस बार तो सब घर पर ही हैं,और इतनी लंबी छुट्टी में सब बना बनाकर और खिला खिलाकर अब कुछ विशेष बनाने का मन नहीं करता।बाहर कहीं जाने का तो सवाल ही नहीं उठता।
वो झांकियाँ,परेड,जयकारे सभी कुछ गुम हैं।पर हमारा देशप्रेम इस दिखावे के ताम-झाम और शोर-शराबे पर आश्रित नही है। हमारी देशभक्ति वो भावना है ,जो हर भारतवासी के शरीर में रक्त की तरह बहती है।देश के प्रति सम्मान और अपमान करनेवालों के प्रति क्रोध स्वतः ही हमारे आचार विचार में समा गया है।
हम अपने घरों में सुरक्षित ये राष्ट्रीय पर्व अपने अपने तरीकों से मना रहे हैं,इस आशा में कि हम इस महामारी से जल्द ही जीतेंगे और नए उत्साह और उमंग के साथ फिर अपना तिरंगा फहराएंगे।।
।।जय हिंद।।
उत्सव स्वाधीनता का भले ही मद्धम है,
पर दिलों में,देशभक्ति की भावना,अब भी कायम है ।
जयकारों के उद्घोष ना सही, गर्दी,हलचल गायब है,
पर लहू में अब भी देश के लिए मिटने का जज्बा कायम है।।